भूल गया मै

  • भूल गया मै

उस चाहत को
उस इबादत को
भूल गया मै
उस तड़प को
उस कशिश को
भूल गया मै
हां भूल गया
उस मदहोशी को
उस ख़ामोशी को
तेरे आने का एहसास
तेरे मुलाकात
का इंतजार
भूल गया मै
हां भूल

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चंदेल तेरी कश्ती के तलबगार बहुत हैं इस पार कुछ मगर ,उस पार बहुत हैं जहां से तू आया है कलेक्टर बनने। तेरे अपने ही लोग दगाबाज़ बहुत हैं